Sunday, 31 March 2019

" एक कदम "

बस एक कदम तू भी बढ़ा ले 
उमड़ रहे थे यह विचार,        
कर गुजरने को बहुत कुछ    
मन में जो हो रही थी हलचल 
पा लेने की बहुत कुछ !         
       
रक्त का संचार भी था          
समय का साथ भी था           
उम्र भी उठ कह रही थी       
साथ तेरे में खड़ी हूँ |            
ना तू इसको व्यर्थ कर,        
    सदुपयोग कर जीवन बना ले | 
   बस एक कदम तू भी बढ़ा ले ! 

   हे सामर्थ तेरे रगो में               
  बस सोच इसको, नष्ट न कर   
  रण में विजय है उसकी,         
  जो सोच पर करता अमल है |  
  बस एक कदम तू भी बढ़ा ले !

   हे इतिहास गवाह इसका,        
           महात्माओ ने संघर्षों से ,बलिदानो से 
        है इस पृथ्वी को है सींचा |             
     जो वो भी सिर्फ सोच में ही जीते, 
      तो आज का सूरज कैसे दीखता !

थी कर गुजरने की जो इच्छा 
 उसपे अमल कर संसार रचा ,
न सोच तू इतना रे  बंधू         
 बस एक कदम तू भी बढ़ा ले 
    बस एक कदम तू भी बढ़ा ले ||